What is Love?

As we are living in a machine age, the fast life, where selfishness is increasing like anything, I always wondered does true love exists. Today I was watching the last march of Major Vibhuti Dhoundiyal and this image came up. The image that is forever going to be etched in my memory.

Here she is looking at her husband, her love continuously. Just a few months of marriage and your husband is no more. Can life be more tragic than this? Still, after her husband’s martyrdom, she held herself strong.  I was watching her looking at her husband without shedding even a drop of tear. That sight broke me but not her, although I can barely imagine what tsunami of emotions she is going within herself.  And then comes the moment when she looks at her husband, resting in the coffin. She smiles and for one last time with a kiss she says “I love you.“. I got my answer that true love does exist. It still does

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वह।।

कल माँ का उसे फ़ोन आया

बेटा कब आएगा तू घर

तेरा चेहरा देखे हुए महीनों हो गए

एकदम सूना सा रहता है यह घर तेरे बिना, तू आएगा तो रौनक भी आ जायेगी,

चिंता मत कर माँ, होली मैं घर पर ही मनाऊंगा 

वो राहुल, संजय और अनिल को बोल देना इस बार बच नहीं पाएंगे होली के दिन वो।

पर इस बार वह समय से पहले ही घर आ गया

ताबूत में, तिरंगे से लिपटा हुआ

माँ के पास तो वह पहुँच गया पर वह रौनक साथ में नहीं ला पाया

राहुल , संजय अनिल को भी होली में न छोड़ने का वादा भी पूरा नहीं कर पाया।

गणतन्त्र

यह प्रजातन्त्र है, यह गणतन्त्र है,

यहाँ मेरी हाँ भी है, तो उनकी ना भी है

यहाँ दक्षिणपंथी हैं तो यहाँ वामपंथी भी


यहाँ हर अगले घर में बदलते विचार हैं

पर अनेकता में ही एकता, यही भारत का सार है,
यह प्रजातन्त्र है, यह गणतन्त्र है ।।
#RepublicDay2019



#गणतंत्रदिवस



रोज़ लिखा करो

रोज़ लिखा करो

चाहे अच्छा चाहे बुरा 

पर रोज़ लिखा करो

चाहे मोहब्बत की हो या चाहे नफ़रत

पर रोज़ लिखा करो

चाहे सरकार के वफादार हो चाहे विरोधियों के सिपहसलार 

पर रोज़ लिखा करो

चाहे तुम्हें अपने शहर की खूबसूरती भायी हो

चाहे वो गाँव का अपनापन कहीं खल रहा हो

पर रोज़ लिखा करो

क्योंकि लिखना कई दफ़ा कई  मर्ज कम कर देता है 

कई ज़ख्म दे देता है

 तो कई भर भी देता है

इसीलिये कहता हूँ कि रोज़ लिखा करो।

चेहरा

एक चेहरा वो, जो तुम सबको दिखाती हो,

एक चेहरा वो जो तुम सबसे छुपाती हो

एक चेहरा वो जिससे तुम मुस्कुरा देती हो

या एक चेहरा वो जिसमें तुम सारा दर्द समाती हो

एक चेहरा वो जिससे मेरा बरसों का राब्ता है

या एक चेहरा ये जिससे मैं आज वाकिफ हुआ हूँ 

मैं किसे सच मानूँ?

उसे जिसे मैं सालों से जानता था,

या उसे जो पर्दा उठने के बाद आज दिखा है…

या चेहरा पढ़ने की बात को मैं पीछे ही रख दूँ

कौन जाने , इस चेहरे के पीछे भी एक चेहरा छुपा हो

सावन और तुम

सावन बड़ा बेईमान सा है,

बिल्कुल तुम्हारी तरह

पता नहीं कब रूठ जाए 

बिल्कुल तुम्हारी तरह

कभी गरजता है, कभी बरसता 
तुम भी तो कुछ वैसी ही हो

हाँ बिल्कुल वैसी ही 

रिमझिम बरसो तो 

मन करे रुको ही नहीं

जरा सी तीव्र हो जाओ तो रुकती नहीं हो

पर मैं तब भी सबसे ज़्यादा प्रेम सावन से ही करता हूँ

हाँ बसन्त खूबसूरत है, ग्रीष्म ऋतु अलौकिक

हाँ पतझड़ में एक उदासीनता है और सर्दी की भी अपनी ही बात है

पर सावन खूबसूरत भी है तो   कुरूप भी 

कभी सीधा भी तो कभी चंचल भी

तुम भी वैसी ही हो , बिल्कुल वैसी ही…

“मेरे प्रिय नेता श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी हैं”

There are very few memories of childhood that remain etched in one’s heart . One such memory is me writing the above sentence on notebook along with this one

” Hamare Desh ke pradhanmantri Shri Atal Bihari Vajpayee Hain

When I started viewing things around me , Atal Ji was the Prime Minister. I was just four-five years old. I was always amazed by the oration style of this man. It was not that tough to understand him. He was people’s leader. I was always in awe of this man. One paper came on his birthday, his collection of poems. “Kaal ke Kapal par”  and few others to name so. It was fascinating to read him.

I always consider him my favourite leader, respect comes naturally. Today the news of his death was shattering. I knew this was coming as his health was not that good. He left politics in 2006 but there was always the feeling of him being around the Indian politics and he always remained relevant and will forever be.

When the news of his health flashed on the screen, prayers for his health from every part of India. This speaks volume about Vajpayee Ji. I always idolized him and there isn’t any leader like him today with acceptability from every section despite the ideology. India has lost its greatest leaders of independent India. He created a void which won’t be filled forever.

You’ll be remembered till eternity, Sir.

वो दिन

शायद वो दिन कुछ खास था

तुम्हारे लिये नहीं पर हाँ मेरे लिए

तुमने शायद मज़ाक किया हो

पर मैंने सच मान लिया उसे

तुम शायद कह कर चली गयी

पर मैं वहीं ठहर गया

रुक सा गया कुछ मैं

बारिश ही का समय था

सिर्फ़ मैं नहीं भीग रहा था अंदर भी कुछ था जो पानी में बह रहा था

वो आस जो मैंने तुमसे लगाई थी

अच्छा ही हुआ कि वो बह गया

वरना मैं वहीं रुका हुआ होता

तुम्हें न सोचकर भी सोचता रहता

वह बारिश कुछ ख़ास थी

वो दिन कुछ खास था

Pain of The mother 

O Ganga Ma,

They say they have come a long way to see you. To worship you, to take bath and dissolve all sins within you, they have come a long way. I wish it was true, which wasn’t. I tried stopping a few of them, tried asking them not to use soap while bathing or washing clothes. They saw me and just ignored me and continued what they were doing. I wonder how will they feel if someone will defecate near their house because they don’t feel ashamed of doing this. Despite public toilet being few metres away they enjoy defecating in public.  The open “naalas” which continuously bring all sewage and waste to the poor river. I don’t understand how long we’ll ignore this thing. We are in our own La La Land that holy Ganga will purify everything no matter how much dirt we throw in the river. Who are we fooling? It is even more unfortunate that foreigners respect feelings towards rivers and they understand the pain of Ganga more than the locals. We live here but we worship Ganga only for show off. We don’t really respect her. We are disappointing both of our mothers.

I’m not putting the painful photo of Ma Ganga on this Ganga-Dussehra because mothers always smile even through pain and hardships …

माँ

#MothersDay #Mom

तुम्हारे लिये मैं क्या लिखूँ

जब से आँख खुली, ख़ुद को तुम्हारे आँचल में पाया

जब भी मैं गिरा, तुमने मुझे संभाला

पता है मैं बहुत कुछ बोल देता हूँ कई बार

एहसास हो जाता है पर माफ़ी मांगने से हिचकिचा जाता हूँ

तुम तब भी समझ जाती हो और बिन कहे ही सब सुन लेती हो

कहीं निकलता हूँ तो तुम हर पांच मिनट में फ़ोन करती हो,

खीज भी जाता हूँ कभी कभी माँ का दिल जो नहीं समझता मैं।

तुम डांट भी लगाती हो तो प्यार भी करती हो

शायद इतना सब मैं अब भी सामने न कह पाऊं,

पर तुम माँ हो, तुम सब जानती हो ।